गुरु के अनमोल वचन | Guru ke Anmol Vachan

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गुरु के अनमोल वचन | Guru ke Anmol Vachan

 

अनमोल वचन : Anmol Vachan

 

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
भावार्थ:
गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है। गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है, उन सद्गुरु को प्रणाम।

सर्वप्रथम भारत एक ऐसा देश है जहां पर माता पिता और गुरू को भगवान समान माना जाता है क्योंकी व्यक्ति सबसे ज्यादा इन्हीं तीनों से सीखता है ये तीनों ही एक व्यक्ति के सर्वप्रथम गुरु होते है जिससे वो जीवन जीने से लेकर सब कुछ सीखता है।

 

सफलता का रहस्य ( Secret of Success )

वेद पुराणों में हमेशा ये बात कही जाती है कि कर्म करे बिना कोई भी व्यक्ति नही रह सकता चाहें वो अच्छा कर्म करे या चाहें वो बुरा कर्म करे उसको अपने कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है पर इसके साथ साथ ये भी कहा जाता है कि अगर आप का लक्ष्य आपको पता है और आपकी नियत साफ है किसी के प्रति कोई बुरा व्यवहार नहीं है और अगर आप अपनें गुरू के आदर्शो पर सच्चाई से चल रहें हो तो आपको सफल बनने से कोई रोक नहीं सकता है जिस कारण से आपके पूर्व बुरे कर्म का प्रभाव कम हो जाता है फिर आप सफलता के शिखर पर पहुंचते है।

 

आशीर्वाद का महत्व 

 

Anmol Vachan

 

एक बात और पढ़िए जैसे कि आप बहुत अच्छे कर्म करते आए है कभी कुछ गलत नहीं किया कभी किसी का बुरा नही चाहा हमेशा सब से अच्छे से बात किया पर अगर आपका स्वभाव घर में उखड़ा सा है आप अपने माता पिता पर चिल्लाते है या उनसे बुरे लहजे में बात कर रहें है फिर तो आप जितना भी बाहर दान पुण्य करलो आप कभी सफल नहीं होगें या हो भी गए तो कुछ ही क्षणों में फिर नीचे आ जाएंगे इसलिए माता पिता और गुरू को कभी भी जीवन में निराश नहीं करना चाहिए क्योंकी ये वो है जो इस जीवन का निर्माण करते है इनके आशीर्वाद के बिना सब कुछ अधूरा है अगर आप गुरु की शक्ती को जानते होंगे तो जरूर आप उनके आदर्शो पर चलते होगें और जो गुरु का अपमान करते है उनको ये बात का अंदाजा भी नही है कि वो कितनी बड़ी मूर्खता कर रहे है और इसके परिणाम कितने भयानक है इसलिए अपने माता पिता और गुरू का आशीर्वाद हमेशा लिजिए मेरी ये बात कुछ नवजवान बच्चों को जरुर भारी लग रही होगी पर यही उम्र है कुछ करने इसलिए भटकना बंद करिए अपनी बुद्धि एकाग्र रखिए और अपनी इस Golden Year का सदुपयोग कर सत्य सफालता की रह पर लेकर जाइए

 

क्या न करें 

1 – गुरु की निंदा सपने में भी न करे।

2 – माता पिता की निंदा या अपमान कभी न करे।

3 – इन तीनों की बुराई कभी भी खुद से न करे और न ही दूसरों को करने दे।

4 – गुरु और माता पिता की निंदा सुनना और करना दोनो ही आपको गड्ढे में धकेल देगा।

5 – अपने सभी इष्टमित्रों को भी समझाए कि वो भी ऐसा न करें

 

Anmol Vachan

 

क्या करें 

 

1 – कर्म करने के साथ साथ गुरु का और माता पिता का आशीर्वाद हमेशा लेते रहें।

2 – कभी भी कितने भी आप बड़े क्यों न हो उमर में गुरु और माता पिता को देखकर प्रतिदिन हमेशा
आशिर्वाद लें।

3 – जिसको जीवन में आप ऊंचाई पर देखना चाहते है उसे ये पोस्ट जरूर शेयर करना।

 

जरूर पढ़े – सफल लोगों की अच्छी आदतें

 

सार –

 

गुरु का अपमान माता पिता का अपमान एक ऐसा पाप है जिससे छोटे से लेकर बड़े व्यक्ति कोई भी इस तीनों का अपमान करेगा तो उसके सफलता के साथ साथ और कई चीजों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ने लगता है इसलिए कभी भी ऐसा न करे अपमान करने वालो को कभी ईश्वर भी माफ नहीं करता इसलिए जितनी जल्दी हो सकें अपने आप को बदल लिजिए और अगर आप हमेशा से ही सम्मान करते है इन तीनों का तो आपको जीवन में कोई भी सफल होने से रोक नही सकता पर तब जब आपका मन आपकी नियत पवित्र होगी पोस्ट से जाने से पहले कमेंट में जय गुरूदेव अवश्य लिखिएगा।

 

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